सेवाओं के साथ साथ बेहद की वैराग्य वृति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो ।
अव्यक्त वाणी गीत
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वैराग्य वृति को जीवन में करें हम धारण ।
समय की है ये पुकार सुनले है आत्मन ।
वैराग्य हो अपने पुराने संस्कारों से ।
देहभान के इन सारे किनारों से ।
सेवाओं की सफलता का है यही सोपान ।
वैराग्य वृति को जीवन में करें हम धारण ।
वैराग्य वृति को, करें हम धारण ।
सरगम ------------------------------------
ब्राह्मण जीवन में खुशी ही श्वास है अपना ।
सदाकाल यही एहसास है अपना ।
सेवा के उमंग में ना रहे कोई कसर ।
बेहद की वैराग्य वृति की इसमें हो लहर ।
वैराग्य हो सदा काल का, देहभान के जंजाल का।
समय के पहले बदलने का लक्ष्य रहे ।
संस्कारों के वंश का भी अंश ना रहे।
बाबा है शिक्षक हमारा समय है रचना।
ना छुप जाए अपनी ये वैराग्य की साधना।
वैराग्य वृति से बदलदे हम ये जहां।
समय की है ये पुकार सुनले आत्मन ।
वैराग्य वृति को, करें हम धारण ।
सरगम -----------------------------------
अशरीरी बनने का है वैराग्य ही आधार।
वैराग्य की धरणी है फलदाई अपार।
बाबा की संतान सच्चे योगी है हम।
संकल्प शक्ति से करें अब व्यर्थ को खत्म।
दिलाराम के दिल तख़्तपर सदा, अधिकार है अपना उम्रभर सदा।
वैराग्य वृति को जीवन में करें हम धारण ।
समय की है ये पुकार सुनले है आत्मन ।
वैराग्य हो अपने पुराने संस्कारों से ।
देहभान के इन सारे किनारों से ।
सेवाओं की सफलता का है यही सोपान ।
वैराग्य वृति को जीवन में करें हम धारण ।
वैराग्य वृति को, करें हम धारण ।
