विजय गीत
मैं मायाजीत, मैं प्रकृतिजीत,
मैं कर्मेन्द्रीयजीत,
मैं मनजीत, मैं ही जगतजीत,
एक बाबा ही मेरा मनमीत।
प्रीत से होती सदा जीत
माया के तीर कभी न चुभें,
स्मृति के दीप कभी न बुझें।
सत्य की ध्वजा सदा लहराए,
प्रीत की डोर कभी न टूटे।
गाते रहें हम ये गीत,
प्रीत से होती सदा जीत
इन्द्रियों पर हो नियंत्रण,
आचरण में हो अनुशासन।
संयम बने सदा चिंतन,
साधना बने हमारा जीवन।
गाते रहें हम ये गीत,
प्रीत से होती सदा जीत
विकारों का जाल न बाँधे,
माया के बंधन पास न आए।
आत्मा का प्रकाश जगमगाए,
बाबा की याद जीवन सजाए।
गाते रहें हम ये गीत,
प्रीत से होती सदा जीत
मैं मायाजीत, मैं प्रकृतिजीत,
मैं कर्मेन्द्रीयजीत,
मैं मनजीत, मैं ही जगतजीत,
एक बाबा ही मेरा मनमीत।
गूंजे सदा ये गीत,
प्रीत से होती सदा जीत