"हो...
(मन का है मीत मिला जन्मों के साथी
संग में रहती हूं जैसे दिया और बाती
मन का है मीत मिला जन्मों के साथी
संग में रहती हूं जैसे दिया और बाती
मस्तक में रहता वो बिंदिया बनके
दिल में बसता है जो धड़कन बनके
ऐसा प्यारा शिव साजन
तन मन कर लिया पावन
हो..तन मन कर लिया पावन)_2
हो..
हाथ शिव का थाम लिया है मुक्त हो जग का बंधन
जन जन का कल्याण करने सोपी ये जीवन
जन जन का कल्याण करने सोपी ये जीवन
परमात्मा अब पिया बनके आए
परमात्मा अब पिया बनके आए
पलकों की पालकी में उठा ले जाए
पलकों की पालकी में उठा ले जाए
इतना प्यारा साजन सबको है भाए
इतना प्यारा साजन सबको है भाए
पलकों की पालकी में उठा ले जाए
पलकों की पालकी में उठा ले जाए
हाथ शिव का थाम लिया है मुक्त हो जग का बंधन
जन जन का कल्याण करने सोपी ये जीवन
जन-जन का कल्याण करने सोपी ये जीवन
खुशियों से बढ़ते कदम तन मन कर लिया पावन
हो.. तन मन कर लिया पावन
हो..
पवित्रता की चुनरी है ये ज्ञान का अंजन
सेवा की पायल पहने द्रणता का कंगन
सेवा की पायल पहने दृढ़ता का कंगन
गुणों से श्रृंगारित है जीवन शंख ,चक्र, गदा ,पद्म अष्टभुजा धारी रूप शेर पे सवार
जी बैठे हैं शेर पे सवार
दुर्गा ,लक्ष्मी ,सरस्वती रूप में
दुर्गा, लक्ष्मी ,सरस्वती रूप में
आज भी है घर-घर यादगार
आज भी है घर-घर यादगार
पवित्रता की चुनरी है ये ज्ञान का अंजन
सेवा की पायल पहने दृढ़ता का कंगन
सेवा की पायल पहने दृढ़ता का कंगन
जग का करना है परिवर्तन
तन मन कर लिया पावन
हो.. तन मन कर लिया पावन
मन का हे मीत मिला जन्मों का साथी
संग में रहती हूं जैसे दिया और बाती
मन का है मीत मिला जन्मों के साथी
संग में रहती हूं जैसे दिया और बाती
मस्तक में रहता वो बिंदिया बनके
दिल में बसता है जो धड़कन बनके
ऐसा प्यारा शिव साजन तन मन कर लिया पावन
हो ..तन मन कर लिया पावन
हो..
मन का मीत मिला जन्मों का साथी"
