याद आती है जब मीठी मम्मा नैनों में नूर भर जाता है
तेरा वो अचल और शांत स्वरूप दिल को बेहद हर्षाता है
याद आती है जब मीठी मम्मा
हाथों में ज्ञान की सितार लिए मुरली का रस तुम पिलाती थी
गंभीर और शीतल मूरत बन सबके दुःख दर्द मिटाती थी
देख कर तेरा मुस्कुराता मुखड़ा हर फ़िक्र स्वतः मिट जाता है
याद आती है जब मीठी मम्मा
जी बाबा हां जी बाबा कहकर हर हुक्म को तूने निभाया था
हर घड़ी हमारी अंतिम घड़ी है यह सुंदर पाठ पढ़ाया था
हुक्मी हुक्म चला रहा है ये मंत्र मम्मा याद आता है
याद आती है जब मीठी मम्मा
क्रोधित आत्माएं भी आकर तेरी छाया में शीतल होती थी
चित्त साफ था तेरा ऐसा मां तू कमियाँ दिल में ना पिरोती थी
मम्मा की उस गुप्त पालना का हर दृष्य सामने आता है
याद आती है जब मीठी मम्मा
जगदंबा सरस्वती मम्मा तुम शिवबाबा की प्यारी मूरत हो
हम बच्चों के दिल के सिंहासन पर सदा सजती तेरी सूरत हो
तुझे याद कर करके हर बच्चा अति इन्द्रिय सुख में खो जाता है
याद आती है जब मीठी मम्मा
