याद की यात्रा से तुझे शिवबाबा मिल जाएंगे
याद की यात्रा से
याद की यात्रा से तुझे शिवबाबा मिल जाएंगे
याद की यात्रा से
मिलेगी वो मंजिल राह में फूल खिल जाएंगे
याद की यात्रा से तुझे शिवबाबा मिल जाएंगे
याद की यात्रा से
मंदिर में नहीं तीर्थ में नहीं ना मिले है माले पे
मानव में नही तत्व में नहीं ना मिले वेदों में वे
आत्म ज्योति जगा तुझे शिवबाबा मिल जाएंगे आत्म्म ज्योति जगा
दान से नहीं गुणगान से नहीं
ना मिले हठयोग से वो
याद से ही हम तो दैवी गुण पाए
महकाए जीवन को
भृकुटी मेरे छान आत्म दर्शन तुझको हो जाएंगे
भृकुटी मेरे छान
गुरुओं से नहीं संतो से नहीं ना मिले पिरो से वो
परमपिता अपना खुद का परिचय दे तब ही तो मिलता है वो
आबू पर्वत पर तुझे परमात्मा मिल जाएंगे
आबू पर्वत पर
याद की यात्रा से तुझे शिवबाबा मिल जाएंगे
याद की यात्रा से
मिलेगी वो मंजिल राह में फूल खिल जाएंगे
याद की यात्रा से तुझे शिवबाबा मिल जाएंगे
याद की यात्रा से
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