

याद में लीन बैठो हर दिन घंटे दो–तीन... फ़ोन हो दूर प्यार हो भरपूर एकांत हो ज़रूर या घर हो या बाहर हो या कहीं हो हर हालत में बैठो याद में प्यार दिल में धैर्य रखो अडिग रहो मौन साधो याद में लीन बैठो हर दिन घंटे दो–तीन.... बीज को बोया प्यार से संजोया संकल्प से उगाया विघ्न हटा अंकुर फूटा अहंकार टूटा अंधेरे मिटेंगे फूल खिलेंगे फल मिलेंगे न हो निराश होगा अब प्रकाश तम का विनाश याद में लीन बैठो हर दिन घंटे दो–तीन... ताला है खुला आकाश वो नीला पंछी को मिला ऊँची है उड़ान पुकारे आसमान नूतन अभियान शिव है शमा परवाना है फ़ना वक्त ये थमा जल जाना समर्पण होना एक हो जाना याद में लीन बैठो हर दिन घंटे दो–तीन... आज करो अब करो यहीं करो रुकना नहीं थकना नहीं झुकना नहीं दृढ़ता ही शक्ति दृढ़ता ही युक्ति दृढ़ता ही प्रगति दृढ़ता ही मुक्ति याद में लीन बैठो हर दिन घंटे दो–तीन...