अव्यक्त वर्ष में हम सभी को अव्यक्त स्थिति बनानी है
अव्यक्त प्राप्ति अव्यक्त अनुभूति करनी और करानी है
बाप समान बनने की
मन में यही लगन है दिल में यही धुन है
बाप समान बनने की
मन में यही लगन है दिल में यही धुन है
यही है लगन यही धुन
बाबा समान बन जाए हम
यही है लगन यही धुन
बाबा समान बन जाए हम
जैसा हो अपना लक्ष्य वैसे ही हो लक्षण
यही है लगन यही धुन
बाबा समान बन जाए हम
यही है लगन
साकारी से आकारी बने
आकारी से निराकारी
अव्यक्त फरिश्ता तब ही बने
जब हम निरहंकारी बने
सूक्ष्म मे भी ना हो देहभान
कोई भी ना हो आकर्षण
यही है लगन यही धुन
बाबा समान बन जाए हम
यही है लगन
जितना हम बने निर्माण
सबके दिलो में होंगे महान
दिल की दुवाये पाने का
यही तो है सहज साधन
दृष्टि में वृत्ती मे सब में ही हो निर्माण
यही है लगन यही धुन
बाबा समान बन जाए हम
यही है लगन
ना व्यक्त की दीवार बने
शुभ भावना की दे किरणे
कैसे भी हो कोई आत्मा
दिल से उसे क्षमा कर ले
स्वार्थ भाव को स्वाहा कर
शुभ भाव हो धारण
यही है लगन यही धुन
बाबा समान बन जाए हम
यही है लगन यही धुन
बाबा समान बन जाए हम
जैसा हो अपना लक्ष्य वैसे ही हो लक्षण
यही है लगन यही धुन
बाबा समान बन जाए हम
यही है लगन
