शिव बाबाऽऽऽ...
मेरे बाबाऽऽऽ...
तेरी वाणीऽऽऽ...
तेरी मुरलीऽऽऽ...
ओऽऽऽ... मेरे शिवबाबाऽऽऽ...
ये वाणी हैं शिव बाबा की
मुरली में यूँ ही मगन रहूँ
नशा ये हैं नारायणी
मनभावन ये परमात्म वाणी
गीता हैं ये स्वयं भगवान की
हर श्वास में इसका गान करूँ
मुरली में यूँ ही मगन रहूँ।।
ये वाणी हैं शिव बाबा की
मुरली में यूँ ही मगन रहूँ....
ये शिव के है उच्चारे
ब्रह्मा को बेहद प्यारे
ये मुरली हैं अमृत का सागर
बड़ी लगन से इसका पान करूँ
मुरली में यूँ ही मगन रहूँ।।
ये वाणी हैं शिव बाबा की
मुरली में यूँ ही मगन रहूँ....
अव्यक्त हैं ये क्रांति
भटके मन को दे शांति
ये झरना हैं प्रभु प्रेम का
बड़े मौज से इसमें स्नान करूँ
मुरली में यूँ ही मगन रहूँ।।
ये वाणी हैं शिव बाबा की
मुरली में यूँ ही मगन रहूँ....
ये दिल था मरुभूमि
सदियों से था जो प्यासा
बरसा है जो परमात्म सावन
खिलता रहे मन का चमन
मुरली में यूँ ही मगन रहूँ।।
ये वाणी हैं शिव बाबा की
मुरली में यूँ ही मगन रहूँ....
