सुनो सुनो ओ अधर कुमार-कुमारी,
लक्ष्मी-नारायण सी जोड़ी तुम्हारी।
सुनो सुनो ओ बाबा के युगल,
खिले तुम जैसे जल में कमल।
जय शिव शक्ति! जय पांडव सेना!
घर-घर मधुबन बना दिया तुमने,
असंभव संभव कर दिया तुमने,
जो सन्यासी न कर सके, किया तुमने,
घर को पवित्र आश्रम बना दिया तुमने।
आग कपास रहे साथ में,
काम कटारी न चले जीवन में,
ज्ञान तलवार खड़ी बीच में —
सत्य के प्रहरी, योग पथ में।
युगल मूर्त तुम, धारणा मूर्त तुम,
शिव शक्ति पांडव सेना तुम।
पद्मापदं भाग्यशाली हो तुम,
क्या थे, क्या बन गए तुम।
जय शिव शक्ति! जय पांडव सेना!
विजय के तिलकधारी तुम,
प्रवृत्ति में निवृत्त तुम,
जीवन बंध से जीवन मुक्त तुम,
गृहस्थ में ट्रस्टी तुम।
पवित्रता ही साधना तुम्हारी,
भाई-भाई की दृष्टि न्यारी,
पावन बनी सृष्टि तुम्हारी,
मरजीवा ये जीवन प्यारी।
उल्टी सीढ़ी अब न चढ़े,
दिव्य संस्कारों से जीवन सजे।
भीड़ में एकांत बसे,
मन में ज्ञान का दीप जले।
जय शिव शक्ति! जय पांडव सेना!
शिव से प्रीत की रीत निभाना,
बच्चों में दिव्य संस्कार भरना।
फ़िज़ूल खर्च तुम न करना,
गृहस्थ में ही स्वर्ग बसाना।
बच्चा बना है तुम्हारा,
अब वो दिलवाला,
जीवन में भर दे,
फिर स्वर्णिम उजाला।
घर-घर में गीता,
गली-गली में पाठशाला,
हर मन मंदिर,
हर दिल में शिवाला।
भोलेनाथ का भंडारा भी सबसे निराला,
शिव की याद में स्वीकारो हर निवाला।
जय शिव शक्ति! जय पांडव सेना!
जय युगल मूर्त! जय कमल मूर्त !
हे युगल वीर! हे अचल तपस्वी!
रुद्र ज्ञान यज्ञ की तुम निर्मल ज्वाला,
स्वयं भगवान बना है तुम्हारा रखवाला।