साकार मुरली
... हम गांव के छोरे निधणके बन गये हैं अब फिर हम स्वर्ग के मालिक बन रहे हैं तो खुशी रहनी चाहिए।
27 November 2020
संस्कृत
Orphans
అనాథలు
अनाथ