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HomeProverbs (Kahavatey)सर्व धर्मानि परित्यज्य मामेकम् शरणम् व्रज अहं त्वा सर्वपापोभ्यो मोक्षयिष्यामि मा षुचः

सर्व धर्मानि परित्यज्य मामेकम् शरणम् व्रज अहं त्वा सर्वपापोभ्यो मोक्षयिष्यामि मा षुचः

साकार मुरली (भगवत् गीता, आध्याय - 18, श्लोक - 66)

... सर्व धर्मानि परित्यज्… इस हद के धर्मों में इतना आंदोलन हो गया है। तो अब इन हद के धर्मों से निकल बेहद में जाना है ... (28 June 2019)

देह के सर्व धर्मों को त्याग तू केवल मुझ एक सर्वशक्तिमान की ही शरण में आ जा, मैं तुझे सर्व पापों से मुक्त कर दूँगा। तू शोक मत कर

Renounce all your bodily religions and come at my almighty refuge. I will make you free from all the sins. Donot grieve

దైహిక సర్వ ధర్మాలను త్యాగం చేసి నీవు సర్వశక్తిమంతుడనైన నా శరణులోకి రమ్ము. నేను నిన్ను సర్వ పాపముల నుండి విముక్తి చేస్తాను. దుఃఖింపవలదు

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