

यज्ञ इतिहास – (चैप्टर 8) - दादी मनोहर इंद्रा जी की ज़ुबानी यह गाथा बाबा, मम्मा और दादियों की शुरुआती सेवाओं, साक्षात्कारों और विशेषताओं का जीवंत वर्णन है, जिसने यज्ञ को मजबूत नींव और विश्वव्यापी विस्तार दिया। बाबा शिक्षक और रक्षक के रूप में : चौदह साल हम भट्टी में रहे, दुनिया की निगाहों से दूर, आवाज़ों से परे। दुनिया में क्या हो रहा है कुछ पता नहीं था। अपनी ही दिनचर्या में मस्त थे — ज्ञान, योग और मनोरंजन था। माउंट आबू आने के बाद : एक-दो साल बाद लौकिक परिवार से पत्र व्यवहार शुरू हुआ। परिवार को ज्ञान धन देने और जीवन से लाभ पहुँचाने के लिए लिखा-पढ़ी हुई। हमने उनसे अलग कमरे, बर्तनों और स्वच्छ बिस्तर का प्रबंध करने को कहा। हम खुद खाना बनाकर भोग लगाते और सभी को खिलाते। सिक्के बदल गए थे, राज्य बदल गया था। न ट्रेन देखी थी, न दुनिया का ज्ञान था, और दिल्ली जाना पड़ा। बाबा ने कैसे तैयार किया : मेरा नाम हरी था और दूसरी बहन का नाम गंगे। बाबा हमें "हर गंगे" कहकर बुलाते और प्रेरणा देते — "तुम पतित पावनी गंगे हो।" हमें अनुभव हुआ कि बाबा से छुट्टी लेकर अपने ज्ञान-योग से सेवा करनी चाहिए। हमने ट्रेन में माताओं की सेवा की और जोधपुर, जयपुर, दिल्ली की माताओं से निमंत्रण मिला। दिल्ली में सेवा : राजेंद्र बाबू, नेहरू जी और इंदिरा गांधी जी के पास मातेश्वरी जी रिकॉर्ड लेकर गए, जिसमें यज्ञ और समय की पहचान थी। दिल्ली में कई स्थानों पर सेवा हुई। एक मंदिर में कमरे के कोने में खाना पकाकर सत्संग होता और आगंतुकों की सेवा की जाती। एक माह में कई माताएँ ध्यान में चली जातीं। माउंट आबू के साक्षात्कार और दादियों के अनुभवों से हमें अपने कर्तव्य पर विश्वास हुआ। मंदिर में कल्पवृक्ष का चित्र और बाबा की चिटकी : दो माह मंदिर में रहे और कल्पवृक्ष का चित्र लगाया। उस पर बाबा ने चिटकी लगवाई। यह देखकर ट्रस्टी नाराज़ हुआ और कहा या तो चिटकी हटाओ या मंदिर खाली करो। हमने चिटकी काट दी और बाबा को समाचार दिया। बाबा ने कहा — "तुम तो रेड बकरियाँ हो, शेरनियाँ नहीं।" एक माह बाद किसी ने कहा कि आप यहाँ नहीं, यमुना घाट पर रहो। यमुना घाट : हमें यमुना घाट भेजा गया जहाँ केवल जंगल और गोडाउन था। कहा गया — "तुम्हारा रक्षक भगवान है।" हम योग-तपस्या करने लगे। तीन दिन बाद एक पहलवान रात को पहरा देने लगा और बाद में बीस पहलवानों को भी लाया। वे दंडवत प्रणाम कर बोले — "आप सच्ची देवियाँ हैं।" उन्होंने सेवा की और कुछ समय बाद दूध, चीनी, नारियल और बीस रुपए लाकर दिए। यह हमारी पहली मदोगिरी बनी। दिल्ली में साक्षात्कार : यमुना किनारे स्नान करने आने वाली एक माता ने हमें अपने शहर के धर्मशाला में बुलाया। वहाँ योग करातीं और कई माताएँ-भाई ट्रांस में चले जाते। कोई श्रीकृष्ण को देखता, कोई रास रचता, कोई ज्योति-प्रकाश अनुभव करता। लोगों का गुस्सा हमें योग में देखकर शांत हो जाता। दिल्ली शहर में भ्रांतियाँ : इन साक्षात्कारों की चर्चा नेहरू जी और इंदिरा गांधी तक पहुँची। इंदिरा जी ने चार बहने भेजीं, जिन्होंने रिपोर्ट अच्छी दी। पर शहर में भ्रांतियाँ फैलीं और गवर्नमेंट तक मामला गया। धर्मशाला की माता ने हमें अस्थायी रूप से मकान खाली करने को कहा। हमें लगा कि संसार को पैगाम दे दिया है, अब हम बाबा के पास लौटेंगे। कानपुर और कुंभ के मेले में सेवा : कुंभ मेले का निमंत्रण मिला। दादी प्रकाशमणि और गंगे दादी गईं। वहाँ मकान और साहित्य से सेवा हुई। फिर कानपुर बुलाया गया। एक सेठ की पत्नी ने हमें स्थान दिया। सेठ जी योग की वाइब्रेशन से आकर्षित होकर साक्षात्कार में पहुँचे और ब्रह्मा बाबा का अनुभव किया। पंद्रह-बीस दिन बाद उन्होंने जाना कि बाबा माउंट आबू में रहते हैं और भगवान उनके तन में आते हैं। वे वहाँ पहुँचे। माउंट आबू में साक्षात्कार : सेठ जी ने अपने मैनेजर और परिवार को माउंट आबू भेजा। सभी को विभिन्न रूपों के साक्षात्कार हुए — लक्ष्मी नारायण और श्रीकृष्ण के। उनके पुत्र पाल ने बाबा को उपहार भेजा — चाँदी का खड़ावा, कटोरी, चम्मच और झुनझुना। अन्य स्थानों पर सेवा : पाल ने बाबा को कानपुर बुलाया और बंगला सेवा में दिया। बाबा ने कानपुर की धरती पर रहकर वहाँ सेवा की। अच्छे वकील, जज और इंजीनियर निकले। लखनऊ से दादा राम निकले, जिन्होंने हांगकांग में सेंटर खोला। दिल्ली, मुंबई, कानपुर और लखनऊ सबसे पुराने सेंटर बने। मम्मा की विशेषताएँ : मम्मा एक सुशील, गुणवान और कुमारी थीं। गायन विद्या में निपुण थीं और हिंदी-अंग्रेज़ी में भाषण करतीं। उनके चेहरे पर दिव्यता थी। बाबा ने उन्हें अपना वारिस चुना। मम्मा गीतों को तर्ज देकर सुनातीं और कोर्स कराते समय लोगों के विकार दूर हो जाते। उनके गुण थे — सरलता, गंभीरता, सहनशीलता, रमणिकता और अंतर-मुक्ता। उन्होंने शक्ति सेना तैयार की। उनसे श्रीलक्ष्मी और बाबा से श्रीनारायण के साक्षात्कार होते थे। मम्मा ने स्थूल-सूक्ष्म पालना बहुत अच्छे से की।