"आओ आबू पर्वत पर आबू के पावन आंगन में
प्रभु प्यार है बरस रहा तु भर ले अपने दामन में
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
भूल स्वार्थमय नगरी को अपनो का अभाव जहा
सच्चे सुख का अनुभव कर ले जीवन में एकबार यहां
नित ज्ञान के मोती बिखर रहे तु भर ले अपने आंचल में
प्रभु प्यार है बरस रहा तु भर ले अपने दामन में
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
शांति प्रेम सहयोग भावना का जग में हैं अकाल जहा
प्रभु स्वयं ही लूटा रहा है खुशियों का भंडार यहां
वरदानों की वर्षा होती
जैसे रिमझिम सावन में
प्रभु प्यार है बरस रहा तु भर ले अपने दामन में
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
मन की लाली खुशियों का तु मुरझाए उपवन में
प्यास बुझा ले जन्मों की तु उनकी एक ही दृष्टि में
प्रभु की लीला को देख स्वयं मधुबन के मीठे प्रांगण में
प्रभु प्यार है बरस रहा तु भर ले अपने दामन में
आओ आबू पर्वत पर आबू के पावन आंगन में
प्रभु प्यार है बरस रहा तु भर ले अपने दामन में
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर
आओ आबू पर्वत पर"
