

पुरूषोत्तम युग में आओ, बने पुरूषोत्तम, शिव बाबा बना रहा हमारा जीवन सुंदरतम। आओ, बने पुरूषोत्तम... आओ, बने पुरूषोत्तम... सतगुणों की सीढ़ी चढ़ें, लक्ष्य हो महानतम, आत्म-अभिमानी हो जीएँ, साधना यही अंतरतम। माया के तूफानों में भी रहें, साहस प्रबलतम, स्मृति की साधना में डूबें, अनुभव गहनतम। मन की गहराइयों में उतरें, छुएँ सत्य कठोरतम, संकल्प हों साफ़-सुथरे, शुचिता अधिकतम। आओ, बने पुरूषोत्तम... आओ, बने पुरूषोत्तम... अधर्म के अंधेरों से टकराएँ, तोड़ें सारे जुल्मोसितम, बाबा के संग नवजीवन रचें, करे उजाला नवीनतम। याद की डोर थामे रहें, बाबा के निकटतम, कमज़ोरियों को त्यागें, छोड़ें संस्कार निकृष्टतम। श्रीमत जीवन में उतरें, जीवन पवित्रतम, सत्य की लौ जलाएँ, ध्येय उत्तमोत्तम। आओ, बने पुरूषोत्तम... आओ, बने पुरूषोत्तम... स्व-परिवर्तन से आरंभ करें, कदम हो सर्वप्रथम, स्नेहभरी वाणी सदा ही बोलें, बरसे अमृतरस मधुरतम। परंपरा की जड़ों से जुड़ें, राजयोग का ज्ञान प्राचीनतम, विश्व नाटक का राज़ समझें, हर पल का घटनाक्रम। अतीन्द्रिय सुख में झूलें, जीवन सबका हो दिव्यतम हृदय के द्वार खुले, सबका हो सुस्वागतम। आओ, बने पुरूषोत्तम... आओ, बने पुरूषोत्तम... सेवा का शिखर चढ़ें, वसुधैव कुटुम्बकम, वैश्विक एकता जगे, हृदय हो विशालतम। मन-मंदिर में प्रकाश हो, अंतर में कर सत्य हृदयंगम, पल-पल बाबा की याद हो, शिव बाबा बना रहा जीवन सुंदरतम। पुरूषोत्तम युग में आओ, बने पुरूषोत्तम शिव बना रहा जीवन सत्यम सुंदरतम। आओ, बने पुरूषोत्तम... आओ, बने पुरूषोत्तम... ______________________________ ______________________________