अभी अभी कहानी शुरू ही की
अभी अभी क्यों कर दी अंत
अभी अभी कहानी शुरू ही की
अभी अभी क्यों कर दी अंत
सबको सुनाते मेरे भाई
खुद कर ली क्यों आंखे बंद
खुद कर ली क्यों आंखे बंद
जगदीश भाई संतो के संत
हे राज ऋषि हे राज हंस
पांडव दल के अग्रज तुम सेशुरू समर्पण परंपरा
आदर्श बने सबके खातिर
सद्गुण का तुममें खान भरा
समय श्वास सभी पल पल अपना सफल किया
ऋषि दधीचि सम स्वाहा हो
प्रभुयोजना को बल दिया
प्रभुयोजना को बल दिया
सबको पसंद थे तभी तो
प्रभु ने भी कर लिया पसंद
प्रभु ने भी कर लिया पसंद
जगदीश भाई संतो के संत
हे राज ऋषि हे राज हंस
वो विघ्नविनाशक तुम गणेश विद्वान बड़े अति बुद्धिवान
हे दिव्यदृष्टि वाले संजय कितनो को दिया है दृष्टिदान
यू तो प्रभु की कार्य योजना नहीं रुकी न रुक सकती
पर कमी आपकी कमी रहेगी
कभी न पूरी हो सकती
कभी न पूरी हो सकती
अब सैर कर रहे बाबा के संग
मुस्कुरा रहे हो मंद मंद
मुस्कुरा रहे हो मंद मंद
जगदीश भाई संतो के संत
हे राज ऋषि हे राज हंस
अभी अभी कहानी शुरू ही की
अभी अभी क्यों कर दी अंत
अभी अभी कहानी शुरू ही की
अभी अभी क्यों कर दी अंत
सबको सुनाते मेरे भाई
खुद कर ली क्यों आंखे बंद
खुद कर ली क्यों आंखे बंद
जगदीश भाई संतो के संत
हे राज ऋषि हे राज हंस
हे राज ऋषि हे राज हंस
हे राज ऋषि हे राज हंस
