बाबा की लागी लगन रे
हुई मै मगन रे के अब घर जाना है
बाबा की लागी लगन रे
हुई मै मगन रे के अब घर जाना है
छोड़कर अब दुनियां का डेरा ए आत्मा अब चल
तुझ बिन सुनी बाबा की धरनी
परदेसिया घर चल
प्यासे है दीप गगन के तेरे दर्शन के के अब घर जाना है
बाबा की लागी लगन रे
हुई मै मगन रे के अब घर जाना है
बोले मन ये प्रीतम के द्वारे
चलने की है धुन
बाबा मेरा मुझको बुलाए उड़ता जाए मन
बिगड़े नसीब खुले है विधाता मिले है
के अब घर जाना है
बाबा की लागी लगन रे
हुई मै मगन रे के अब घर जाना है
धारण करके गुणों की मूर्ती
हम चलें है सजकर
पावन बनके जाएंगे घर को
दुनियां पुरानी तजकर
कर्मों के बोझ तले है की दुनियां पले है
हमें उड़ जाना है
बाबा की लागी लगन रे हुई मै मगन रे के अब घर जाना है
बाबा की लागी लगन रे हुई मै मगन रे के अब घर जाना है
के अब घर जाना है
के अब घर जाना है
