बाबा तेरे इश्क में मन मस्ताना हुआ रे
बाबा तेरे इश्क में मन दीवाना हुआ
रे
नैनों के द्वार खुले नूर का दर्या बहा रे
बाबा तेरे इश्क में मन मस्ताना हुआ रे
दिल के शहर में तू रोशनी बन के आया
रूह के सितारे तेरे नूर से जगमगाया
सांसों में घुल गया जैसे इत्र सा तू
हर धड़कन कहें बाबा बाबा तू ही तू
भुला हर गम मिल गई तेरी वो गोद सी छांव रे
जीवन को मिल गया एक नया सा सहारा रे
बाबा तेरे इश्क में मन दीवाना हुआ
रे
नैनों के द्वार खुले नूर का दर्या बहा रे
याद तेरी महफिल बन गई है रोज का समा रे
इश्क़ तेरा सिखा गया सच्चे सुकून का सिलसिला
मंज़िल ही मिली नहीं तू ही मंज़िल बन गया
राह दिखाने वाला भी राह बन के चल पड़ा
छू ले जो तू मिट जाए हर बंधन का साया
रूह को मिल गया परम प्यार का सच्चा माया
बाबा तेरे इश्क में मन दीवाना हुआ
रे
नैनों के द्वार खुले नूर का दर्या बहा रे
हो या वाह वाह हो या वाह वाह इश्क तेरा जिक्र बने दिल बोले
वाह बाबा
हो या वाह वाह हो या वाह वाह
रूह फिर से ना जुटे जैसे मन पर चढ़ गया नशा
बाबा तेरे इश्क में मन दीवाना हुआ
रे
नैनों के द्वार खुले नूर का दर्या बहा रे
तू मन का महबूब भी तू नूर ए जहां भी
तू ही मेरी रूह का तार तू ही नगमा ए जहां भी
पल पल तेरे संग जो एहसास जोड़ा मिलता
जैसे खोई खोई रूह अपना खुदा मिलता
दूरी थी दो युगों की पल में मिट सी गई रे
बाबा की गोद में रह फिर लौट आई रे
बाबा तेरे इश्क में मन मस्ताना हुआ रे
बाबा तेरे इश्क में मन दीवाना हुआ
रे
तू रूह का साथी मेरी पहचान बना रे
बाबा तेरे इश्क में मन मस्ताना हुआ रे
