िलकी दवातमें कलम डुबोकर बाबा तुजे एक खत लिखता हूं
यादे जीगरकी स्याही लेकर हाले दिल सब सच लिखता हूं
दिल की दवात में कलम डुबोकर बाबा तुजे एक खत लिखता हूं
शाम सवेरे याद में तेरी बीते दिन और बीते रैना
तेरे ख्यालों में रहु हरपल तुज् को ही देखे ये मेरे नयना
लगता है बाबा हाथो मै तेरे हाथ सदा देकर चलता हूं
दिलकी दवातमें कलम डुबोकर बाबा तुजे एक खत लिखता हूं
मन में बसी है मूरत तेरी दिल मै है तेरी तस्वीर
परमधाम से आकर बाबा बना रहे सबकी तकदीर
हद का साथ यही है बाबा सम्मुख मिलने को लिखता हूं
दिल की दवात में कलम डुबोकर बाबा तुजे एक खत लिखता हूं
यादे जीगरकी स्याही लेकर हले दिल सब सच लिखता हूं
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
खत लिखता हूं
ओ ओ ओ ओ ओ
सच लिखता हूं
ओ ओ ओ ओ ओ
खत लिखता हूं
ओ ओ ओ ओ ओ
सच लिखता हूं
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