चलू तो हवाओ जैसी हूं मैं
रुकु तो बहारों जैसी हूं मैं
मै नारी हूं शृंगार धरा का
तपन में छांव जैसी हूं मैं
तपन में छांव जैसी हूं मैं
तपन में छांव जैसी हूं मैं
चलू तो हवाओ जैसी हूं मैं
रुकु तो बहारों जैसी हूं मैं
मै नारी हूं शृंगार धरा का
तपन में छांव जैसी हूं मैं
मै महक भरी फुलवारी हूं
मै चहक भरी किलकारी हूं
मुझसे रोशन हर शहर
मै घर उपवन की क्यारी हूं
कहू तो ऋचाओ जैसी हूं मैं
ऊठू तो दुवाओं जैसी हूं मैं
हर आलम खामोश हो जब
तो सच किस नाव जैसी हूं मैं
तो सच किस नाव जैसी हूं मैं
तो सच किस नाव जैसी हूं मैं
चलू तो हवाओ जैसी हूं मैं
रुकु तो बहारों जैसी हूं मैं
मै नारी हूं शृंगार धरा का
तपन में छांव जैसी हूं मैं
तपन में छांव जैसी हूं मैं
तपन में छांव जैसी हूं मैं
