"चमक उठा है भाग्य सितारा पाकर प्रभूका प्यार
चमक उठा है भाग्य सितारा पाकर प्रभूका प्यार
बांध के घुंगरू खुशियों के
बांध के घुंगरू खुशियों के
नाचे मन संसार
चमक उठा है भाग्य सितारा पाकर प्रभूका प्यार
मेरे बाबा मुझको बुलाते फैलाए बाहों का हार
मेरे बाबा मुझको बुलाते फैलाए बाहों का हार
पल पल हम भी वतन को जाते
करते गुणों से रोज शृंगार
प्रभु अनुभव के स्वर गूंजे
प्रभु अनुभव के स्वर गूंजे
एक यही झंकार
चमक उठा है भाग्य सितारा पाकर प्रभूका प्यार
सजाके हमने यादों की डोली खुद को बिठा दिया
सजाके हमने यादों की डोली खुद को बिठा दिया
बनके फरिश्ते उड़ते रहते माया से मन को छुड़ा लिया
हम परवाने है प्रभु के
हम परवाने है प्रभु के
उड़ते गगन के पार
चमक उठा है भाग्य सितारा पाकर प्रभूका प्यार
चमक उठा है भाग्य सितारा पाकर प्रभूका प्यार
बांध के घुंगरू खुशियों के
बांध के घुंगरू खुशियों के
नाचे मन संसार
चमक उठा है भाग्य सितारा पाकर प्रभूका प्यार
पाकर प्रभूका प्यार
पाकर प्रभूका प्यार
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