"दादी प्रकाश मणि जी का संपूर्ण जीवन एक उदाहरण है.
मुझे उनके बारेमे गीत की वो पंक्तियां याद आ रही है
हम है दिए औरोको लिए
जिन्हें तूफानों में चलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहा गिरना और संभलना है
वो प्रकाश स्तंभ
आज भी अमर है जीवंत है शाश्वत है
वो मणि आज भी सबकी राहों में ज्ञान और शक्ति का संचार कर रही है
उस मीठी मां के लिए हर एक के दिल से परवश ही ये आवाज आती है
ये आवाज आती है
दादी हमारी दादी दादी ओ प्यारी दादी
दादी हमारी दादी दादी ओ प्यारी दादी
सिखाया तुमने हमको हा जी का पाठ पढ़ाना
ना दुख देना किसीको सब से मिलकर रहना
सिखाया तुमने हमको हा जी का पाठ पढ़ाना
ना दुख देना किसीको सब से मिलकर रहना
दादी हमारी दादी दादी ओ प्यारी दादी
दादी हमारी दादी दादी ओ प्यारी दादी
तेरी रूहानी दृष्टि हमको शीतल बनाती
तेरी मधुर वाणी हमको मीठा बनाती
तेरी रूहानी दृष्टि हमको शीतल बनाती
तेरी मधुर वाणी हमको मीठा बनाती
दादी हमारी दादी दादी ओ प्यारी दादी
दादी हमारी दादी दादी ओ प्यारी दादी
दादी हमारी दादी दादी ओ प्यारी दादी"
