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"दिल में मेरे प्रभु स्नेह के गुल है खिले दिल में मेरे प्रभु स्नेह के गुल है खिले जब से जमी पे आकर के हमसे मिले ये मिलन से मिटे जीवनके शिकवे गिलेह दिल में मेरे प्रभु स्नेह के गुल है खिले थी हजारों यही तमन्ना पाने को एक झलक थी हजारों यही तमन्ना पाने को एक झलक तरस रहे थे उसके दरस को तरस रहे थे उसके दरस को कितनी थी नैनो की ललक संगमयुगकी इन लम्होंमें खुशियोंकी मन तू जीले दिल में मेरे प्रभु स्नेह के गुल है खिले जी भरके प्यार कर ले यही वक्त है रे मनवा जी भरके प्यार कर ले यही वक्त है रे मनवा प्रभु शरण में होकर अर्पण प्रभु शरण में होकर अर्पण आबाद तू करले री मनवा अमृत झरता किरण किरणसे इन नयनों से जीले दिल में मेरे प्रभु स्नेह के गुल है खिले जब से जमी पे आकर के हमसे मिले ये मिलन से मिटे जीवन के शिकवे गिलेह दिल में मेरे प्रभु स्नेह के गुल है खिले ________________________________"