ओम शांति ओम शांति ओम शांति
ब्रह्माकुमार नवल भाईजी शिव का साकार माध्यम बनके आपके लिए लाए है शिवम मंत्र
लाए है शिव पिता परमधाम से अपने बच्चों से जो ड्रामा करवाया है बड़ी शान से
गीतों ने जो गुल खिलाए है उनकी खुशबू आई है शिवबाबा के दिल जान से
1) 84 जन्मों का ये खेल पुराना है
शिव पिता आदि में आए हमे अब घर जाना है
2)भोलेनाथ प्रभु आप प्राणों से प्यारे हो हम बने फिर वही बिछड़े दुलारे है
3) शिव शिव बोले कोयलिया
दिलाराम की सुना दो मुरलियां बोलो शिवम् गाओ शिवम बिछाओ ओढ़ लो शिवम
पी लो दुखियों के आसू
ले लो सभी के गम
बोलो शिवम् बोलो शिवम्
दिल से बाबा कहो एकबार
बाबा करते सदा ही प्यार
तन मन की धड़कन में
मन पंछी हो आत्म वतन में
तुम पहनो फरिश्तों वाला चोला
मनमनाभव मामेकम के तार
जोड लो कर लो शिव का अधिकार
अपने वहा घर के आंगन में
मैंने जाके गगन में ढूंढा,
ब्रह्मा बाबा से मैंने पुछा बाबा बोले बताओ तुम कहा रहते हो
ये राज अपने बच्चों से कहना है मुझे सेवा धारियों के अंग संग रहना है
इन रचनाओं को सुनकर अपने इस अंतिम जन्म में जीवनमुक्ति धूप की अनुभूति और अमर भव का वरदान प्राप्त करे
ओम शांति ओम शांति ओम शांत
