"एक फ़रिश्ता आया है, ऊँचे-ऊँचे धाम से
अपने जैसे फ़रिश्ते रचने, बड़े निराले काम से
एक फ़रिश्ता आया है,...
अरावली आबू पर्वत पर, उसको आते देखा है
भोले-भाले दिल पर लिखता, तकदीरों का लेखा है
सपना नहीं सब जानते उसको, ब्रह्मा बाबा नाम से
अपने जैसे फ़रिश्ते रचने, बड़े निराले काम से...
शीतल-शीतल दृष्टि से, उसके जादू-सा होता है
जो भी आता पास में उसके, सारी सुधबुध खोता है
नूर निराला छलक रहा है, उसके रूप ललाम से
अपने जैसे फ़रिश्ते रचने, बड़े निराले काम से...
भारत माँ के बिखरे मोती चुन-चुन कर संजोया है
प्रेम, एकता, पवित्रता की माला में पिरोया है
शिव शक्ति भारत माँ की जय, कहे विनम्र प्रणाम से
अपने जैसे फ़रिश्ते रचने, बड़े निराले काम से...
एक फ़रिश्ता आया है.."
