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फरिश्ता रुप रचकर देह का भान तजकर फरिश्ता रुप रचकर देह का भान तजकर चलें है पार गगन निराले अपने वतन निराले अपने वतन फरिश्ता रुप रचकर चांदनी बिखरी हैं मगर कोई चांद नहीं बाबा से बात होती हैं मगर कोई नाद नहीं चांदनी बिखरी हैं मगर कोई चांद नहीं बाबा से बात होती हैं मगर कोई नाद नहीं प्रभा मंडल में है बैठा फरिश्ता वो मुस्कुराता मनाता मधुर मिलन निराले अपने वतन फरिश्ता रुप रचकर देह का भान तजकर चलें है पार गगन निराले अपने वतन निराले अपने वतन फरिश्ता रुप रचकर ओ बाबा प्राण प्यारे हमारा दिल ही गाए ओ बाबा प्राण प्यारे हमारा दिल ही गाए बनके अव्यक्त हम भी अभी आए की आए लगन में मगन हम रहते प्रेम के पुष्प है झरते विहस्ते मन मधुबन फरिश्ता रुप रचकर देह का भान तजकर चलें है पार गगन निराले अपने वतन निराले अपने वतन निराले अपने वतन फरिश्ता रुप रचकर