"हम भारतवालों को फिर से
जग को नया बनाना है
हम भारतवालों को फिर से
जग को नया बनाना है
परमपिता का ये संदेशा
घर-घर तक पहुँचाना है
परमपिता का ये संदेशा
घर-घर तक पहुँचाना है
शिव ही देते ज्ञान यहाँ
शिव ही योग सिखाते हैं
ब्रह्मा तन में आकर शिव ही नव निर्माण कराते हैं
अन्धकार में भटक रहे जो
उनको मुक्त कराना है
हम भारतवालों को फिर से
जग को नया बनाना है
हम भारतवालों को फिर से
जग को नया बनाना है
भटक रहे क्यूँ खोज रहे क्या,
शान्तिहीन क्यूँ हुए विकल
ज्ञान के सागर अब फिर आकर बता रहे हैं युक्ति सरल
पवित्रता की राह दिखाकर ऊंच चरित्र बनाना है
हम भारतवालों को फिर से
जग को नया बनाना है
हम भारतवालों को फिर से
जग को नया बनाना है
हम हैं आत्मा, तुम हो आत्मा,
शिव ही है परमात्मा
जन्म-जन्म के विकारों क कारण देव बनो हे दुरात्मा
चरित्रता और पवित्रता से योग ज्वाला जलाना है
हम भारतवालों को फिर से
जग को नया बनाना है
हम भारतवालों को फिर से
जग को नया बनाना है
गीता ज्ञान गूँज रहा है,
गूँज रही है मुरली प्यारी
ज्ञान की गंगा छलक रही है,
तन-मन से करती न्यारी
गीता का है कौन प्रवर्तक
ये सबको समझाना है
हम भारतवालों को फिर से.
जग को नया बनाना है
हम भारतवालों को फिर से
जग को नया बनाना है
"
