इस धरती पर आकर जिसने
फैलाया है प्यार ही प्यार
करुणा का सागर झलकायां
निराकार होकर साकार
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
इस धरती पर आकर जिसने
फैलाया है प्यार ही प्यार
करुणा का सागर झलकायां
निराकार होकर साकार
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
कल्प कल्प के बिछड़े थे हम
ओ बाबा तुम आन मिले
प्रभु मिलन की आस बुझी
खुशियों के अरमान खिले
अपना बनाया गले लगाया
ब्रम्हा तन लेकर आधार
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
हमको दी पहचान हमारी
खुद से ऊंचा मान दिया
भले करम करना सीखलाकर
जगमें हमें महान किया
भाग्य जगाए है जन जन के
सबपर करके हो उपकार
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
आशाओं के दीप जलाकर
अधरों को मुस्कान मिली
उलझन सारी सुलझी पलमें
हर मुश्किल आसान हुई
धन्यवाद हम करे तो कैसे
व्यक्त करे कैसे आभार
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
बाबा शिव बाबा
