

ितने भी करे उतने कम है धन्यवाद तुम्हारे जितने भी करे उतने कम है धन्यवाद तुम्हारे सतयुग की रचना है तू प्रभु धरा पे आप पधारे जितने भी करे उतने कम है धन्यवाद तुम्हारे ब्रम्हा तनको धारण कर सद्ज्ञान का अलख जगाया ब्रम्हा तनको धारण कर सद्ज्ञान का अलख जगाया पहचान अा दी देवो को और सत्य का पाठ पढ़ाया आत्म दीपक जलाकर सब के दूर किए अंधियारे जितने भी करे उतने कम है धन्यवाद तुम्हारे नारीका सम्मान बढ़ाया ऊंचा दिया है स्थान सदा नारीका सम्मान बढ़ाया ऊंचा दिया है स्थान सदा पतित पावनी गंगाये है बाट रही सदज्ञान नया ब्रम्हाकुमारी ने लाखो के जीवन है सवारे जितने भी करे उतने कम है धन्यवाद तुम्हारे दृष्टी से सृष्टि को बदलना हमको आप सिखाते दृष्टी से सृष्टि को बदलना हमको आप सिखाते हो मुरली के द्वारा बच्चो को बाबा रोज पढ़ाते हो हर अंधियारे जीवन को तुम बाट रहे उंजियारे जितने भी करे उतने कम है धन्यवाद तुम्हारे सतयुग की रचना है तू प्रभु धरा पे आप पधारे जितने भी करे उतने कम है धन्यवाद तुम्हारे धन्यवाद तुम्हारे धन्यवाद तुम्हारे —----------------------------------------