जितना याद करूं उतनी खुशियां बढ़ती है
जितना तुझे चाहू उतनी चाहत बढ़ती है
तू ही कामधेनु तू ही कल्पवृक्ष तेरी यादें ही मेरा शिवालय है
तू साँसों की धड़कन यादों में नाचे
ये मन
नजरों में बस जाना मेरा सुखालय है
तेरा बनने से बाबा आनंद ही आनंद है
अपना कहने से ही बाबा आनंद ही आनंद है
हर डगर पर तेरा साथ हो अहसास यहीं रहता है
लब पर तेरा ही नाम हो विश्वास यही रहता है
तू ही जादूगर तू ही रत्नागर तेरा साथ रहना मेरा शिवालय है
तू प्यार का सागर भरता मेरी गागर सांसो में बस जाना मेरा सुखालय है
तेरा बनने से बाबा आनंद ही आनंद है
अपना कहने से बाबा आनंद ही आनंद है
