जो मिला तुमको अब तक वो तेरे ही कर्म फल अगर अच्छा फल चाहिए सत्कर्म कर हर फल कर्मों से ही मानव है महान कर्मों से ही उसकी पहचान कर श्रेष्ठ कर्म ही मानव तू बन जाएगा फिर देव समान कर्मों से ही हे मानव तू करके करम पीछे क्यों पछताता है जैसा कर्म तू करता है वैसा ही फल तू पाता है वैसा ही फल तू पाता है मरकर भी अमर कहलाता है जो श्रेष्ठ कर्म कर जाता है कर्मों से ही मानव है महान कर्मों से ही उसकी पहचान कर्मों से ही उपकारी पर उपकार कर निस्वार्थ स्नेह लुटाए जा छल कपट ना हो प्यार ही प्यार हो रिश्तों को यू महकाए जा रिश्तों को यू महकाए जा शुभकर्मों से मुस्कराते हुए सुख मन में सभी का लाना है कर्मों से ही मानव है महान कर्मों से उसकी पहचान कर श्रेष्ठ कर्म ही मानव तू बन जाएगा फिर देव समान कर्मों से ही कर्मों से ही