

खड़े हो शिव के पूजन को चढ़ाऊ क्या भगवन तुमको खड़ा हुं तेरे पूजन को चढ़ाऊं क्या भगवन तुमको जो कैसे हो प्रभु दर्शन बताओं हे प्रभु हमको अगर मैं दीप जलाता हुं तो वो परवाने जलाता है अगर मैं दीप जलाती हुं तो वो परवाने जलाता है इसी से मन हट जाता है चढ़ाऊं क्या भगवन तुमको अगर मैं जल चढ़ाती हुं तो वो मछली का झूठा है अगर मैं जल चढ़ाता हुं तो वो मछली का झूठा है इसी से मन हट जाता है चढ़ाऊं क्या भगवन तुमको अगर मैं फूल चढ़ाता हु तो उसे भवरो ने सुंघा है अगर मैं पुष्प चढ़ाती हु तो उसे भवरों ने सुंघा है इसी से मन हट जाता है चढ़ाऊं क्या भगवन तुमको अगर मैं दूध चढ़ाती हुं तो हक बछड़े का छीना है अगर मैं दूध चढ़ाता हुं तो हक बछड़े का छीना है इसी से मन हट जाता है चढ़ाऊं क्या भगवन तुमको अगर मैं फल चढ़ाता हुं तो वो पंछी का झूठा है अगर मैं फल चढ़ाता हुं तो वो पंछी का झूठा है इसी से मन हट जाता है चढ़ाऊं क्या भगवन तुमको अगर मैं वस्त्र चढ़ाती हु उसे रंगरेजो ने रंग है अगर मैं वस्त्र चढ़ाता हु उसे रंगरेजो ने रंग है इसी से मन हट जाता है चढ़ाऊं क्या भगवन तुमको अगर मैं धन चढ़ाता हु तो वो तुम से ही आया है अगर मैं धन चढ़ाती हु तो वो तुम से ही आया है इसी से मन हट जाता है चढ़ाऊं क्या भगवन तुमको अगर मैं धूप जलाती हुं तो प्रदूषण होता है अगर मैं धूप जलाती हुं तो प्रदूषण होता है इसी से मन हट जाता है चढ़ाऊं क्या भगवन तुमको खड़े हो जो मेरे पूजन को चढ़ा दो मन विकारों को खड़े हो जो शिव के पूजन को चढ़ा दो मन विकारों को मन का मैंल धो धो के बिठाऊ पलकों पे तुमको तीर्थ पर धक्के खाए है वहा पत्थर ही पाए है तीर्थ पर धक्के खाए है वहा पत्थर ही पाए है जलाशय कर दिए मैंले वहा पुतले बहाए है जीवन जल बेचते हो तुम जीवन जल बेचते हो तुम जो सावन बरसाए तुमको जीवन जल बेचते हो तुम जो सावन बरसाए तुमको