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तेरा मन जैसा सोचेगा तू वैसा ही बन जाएगा ना सोच कभी तू रोगी है हर दर्द तेरा मिट जाएगा खुद को रोगी नहीं राजयोगी समझो खुद को रोगी नहीं राजयोगी समझो तो बीमार चेहरा भी खिल जाएगा खिल जाएगा अच्छा बनने कि इच्छा न छोड़ो कभी नया जीवन तुम्हे फिर से मिल जाएगा मिल जाएगा खुद को रोगी नहीं राजयोगी समझो लाख तूफान दुख के भी आए तो क्या अपने तकदीर पे मुस्कुराते रहो खुद को देह से न्यारा समझते हुए परमात्मा से मन को लगाते रही इस धरती पे मेहमान बनकर जिओ ओ ओ ओ इस धरती पे मेहमान बनकर जिओ तो भाग्य महान बन जाएगा बन जाएगा खुद को रोगी नहीं राजयोगी समझो हर सासो में शिव बाबा की याद हो रोग कैसा भी हो फिक हो जाएगा मन को अचल रखने वाला सदा निरोगी काया फिर से पा लेता है अपनी हिम्मत ना कमजोर करना कभी ओ ओ ओ अपनी हिम्मत ना कमजोर करना कभी दर्द कैसा भी हो दूर हो जाएगा दूर हो जाएगा खुद को रोगी नहीं राजयोगी समझो ज्ञान का दीप मन में जलाते हुए हर समस्या को खेल समझते चलो मान अपमान में जय पराजय में भी अपने मनको मजबूत बनाते चलो हसते हसते शिव बाबा को याद करो ओ ओ ओ हसते हसते शिव बाबा को याद करो हर ग़म खुशी में बदल जाएगा बदल जाएगा खुद को रोगी नहीं राजयोगी समझो तो बीमार चेहरा भी खिल जाएगा खिल जाएगा अच्छा बनने कि इच्छा न छोड़ो कभी नया जीवन तुम्हे फिर से मिल जाएगा मिल जाएगा खुद को रोगी नहीं राजयोगी समझो —--------------------------------------