ॐ शांति रस बरसे रे...
ॐ शांति रस बरसे रे...
ॐ शांति रस बरसे रे...
ॐ शांति ॐ शांति
ॐ शांति ॐ शांति
क्रांति का नाद गूँजे रे,
प्राणों में प्राण भरें रे।
ऊर्जा की अग्नि जले रे,
ॐ शांति रस बरसे रे...
ये क्रांति है प्राण की
ऊर्जा के उत्थान की
आरोहण है शक्ति का
संरक्षण है ब्रह्मचर्य का।
ॐ शांति रस बरसे रे...
ॐ शांति रस बरसे रे...
नर्तन है संकल्प का
गीत है परिवर्तन का
ये क्रांति है प्रचंड
ये क्रांति है अखंड।
ये ऊर्जा है अग्नि-कुंड
ये ऊर्जा है यज्ञ-कुंड
संगम में है संभव
उत्क्रांति थी जो असंभव।।
असंभव संभव की है ये अभिक्रांति
ॐ शांति से ही मिटे हर भ्रांति।
जग में फैले उजियारा,
हर दिल में प्रेम की धारा।
मानवता का हो उत्थान,
शिव बाबा का हो गुणगान।।
ॐ शांति ॐ शांति ...
ॐ शांति ॐ शांति ...
