

ॐ शांति रस बरसे रे... ॐ शांति रस बरसे रे... ॐ शांति रस बरसे रे... ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति क्रांति का नाद गूँजे रे, प्राणों में प्राण भरें रे। ऊर्जा की अग्नि जले रे, ॐ शांति रस बरसे रे... ये क्रांति है प्राण की ऊर्जा के उत्थान की आरोहण है शक्ति का संरक्षण है ब्रह्मचर्य का। ॐ शांति रस बरसे रे... ॐ शांति रस बरसे रे... नर्तन है संकल्प का गीत है परिवर्तन का ये क्रांति है प्रचंड ये क्रांति है अखंड। ये ऊर्जा है अग्नि-कुंड ये ऊर्जा है यज्ञ-कुंड संगम में है संभव उत्क्रांति थी जो असंभव।। असंभव संभव की है ये अभिक्रांति ॐ शांति से ही मिटे हर भ्रांति। जग में फैले उजियारा, हर दिल में प्रेम की धारा। मानवता का हो उत्थान, शिव बाबा का हो गुणगान।। ॐ शांति ॐ शांति ... ॐ शांति ॐ शांति ...