प्रभु का वो लाल है, करता कमाल है,
कोटों में कोई वो ब्रह्मा कुमार है।
सूर्य-सा तेज है जिसमें,
अग्नि-सा प्रखर है।
वायु-सा वेग जिसमें,
धरती-सा धैर्य है।
वसुंधरा का वो रूहानी श्रृंगार है।
कुमार करें कमाल,
शिव के लाल करें कमाल,
ब्रह्माकुमार करें कमाल।
प्रभु का वो लाल है, करता कमाल है,
कोटों में कोई वो ब्रह्मा कुमार है।
चेहरे पर तेज है, वाणी में ओज है।
हृदय में करुणा है जिसके,
मुख में मधुर बोल हैं।
दिल में दिलाराम का दिखता प्यार है।
कुमार करें कमाल,
शिव के लाल करें कमाल,
ब्रह्माकुमार करें कमाल।
प्रभु का वो लाल है, करता कमाल है,
कोटों में कोई वो ब्रह्मा कुमार है।
विवेक है गणेश जैसा,
शक्ति में भीम है।
लक्ष्य है अर्जुन जैसा,
अंगद-सा स्थिर है।
पवित्रता में दिखता जैसे सनत कुमार है।
कुमार करें कमाल,
शिव के लाल करें कमाल,
ब्रह्माकुमार करें कमाल।
