

सुबह खामोश और आंखों में नमी होगी यही बस मेरी दास्तानें जिंदगी होगी भरने को तो हर जख्म भर जाएगा लेकिन कैसे भरेगी वो जगह दादीजी जहां आपकी कमी होगी जहां आपकी कमी होगी हो हो हो हो ज्ञान रत्नों से सजी सजाए खुशियोंसे भरी वो वादि चली ज्ञान रत्नों से सजी सजाए खुशियोंसे भरी वो वादि चले सर्व की झोलियां थी वो भरती वतन को वो प्यारी फरिश्ता चले रतनमोहिनी नाम तुमको मिला रतनमोहिनी नाम तुमको मिला ज्ञान रत्नों की खुशबू से मधुबन खिला ज्ञान रत्नों की खुशबू से मधुबन खिला खूबियों की धनी मीठी दादी खुशियोंसे भरी वो वादि चली ज्ञान रत्नों से सजी सजाए खुशियोंसे भरी वो वादि चली दुनिया के गुलशन में तुमसा ना कोई गुलाब है दुनिया के गुलशन में तुमसा ना कोई गुलाब है बेमिसाल थी सेवा में जैसे वो गीता ज्ञान किताब थी सेवाओं का परचम लहराती खुशियोंसे भरी वो वादि चली ज्ञान रत्नों से सजी सजाए खुशियोंसे भरी वो वादि चली युवाओं की प्रेरणा तुम दादी सौ बरस में भी युवा कहलाई युवाओं की प्रेरणा तुम दादी सौ बरस में भी युवा कहलाई संघर्षों की वो मिसाल थी हर राह में दृढ़ता की ढाल थी युवा दादी मेरी युवा दादी तुम हमारे दिलो को दिल से भाई ज्ञान रत्नों से सजी सजाए खुशियोंसे भरी वो वादि चली तेरी अंचल छैया में जहांका सुकून वो दादी मेरी थी फरिश्ता कोई नाम तेरा लेते ही भर आते नयन संसार छोड़ा पर साथ नहीं ज्ञान रत्नों से सजी सजाए खुशियोंसे भरी वो वादि चली