"क्या गीता द्वापर में गाई, या शिव ने अब ये सुनाई
ये उलझन सामने आई, ज़रा सोचो ज़रा सोचो
क्या गीता द्वापर में गाई, या शिव ने अब ये सुनाई
ये उलझन सामने आई, ज़रा सोचो ज़रा सोचो
क्या गीता द्वापर में गा......ई....
शिव बाबा ही है बिन्दु रुप
शिव बाबा ही है ज्योति स्वरुप
शिव बाबा ही है अजन्मे
शिव बाबा ही है अभोक्ते
शिव बाबा पतित पावन हैं
शिव बाबा ज्ञान के सागर हैं
शिव बाबा परम शिक्षक हैं
शिव बाबा परम पिता हैं
क्या गीता द्वापर में गाई, या शिव ने अब है सुनाईं
ये उलझन सामने आई, ज़रा सोचो
ज़रा सोचो
क्या गीता द्वापर में गा.......ई
जन्म मरण से जो न्यारे,वो शिव बाबा हैं निराले
ब्रह्मा, विष्णु और शंकर के शिव बाबा ही है रचयिते
दिव्य दृष्टि के विधाता
जीवन मुक्ति के है दाता
सर्व शक्तिवान वरदाता
आदि अंत के है ज्ञाता
क्या गीता द्वापर में गाई, या शिव ने अब है सुनाईं
ये उलझन सामने आई,ज़रा सोचो जरा सोचो
क्या गीता द्वापर में गाई, या शिव ने अब है सुनाईं
ये उलझन सामने आई, ज़रा सोचो ज़रा सोचो
क्या गीता द्वापर में गाई, या शिव ने अब ये सुनाईं
या शिव ने अब है सुनाईं
या शिव ने अब है सुनाईं"
