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"क्या कहे के खुशिका ठिकाना नहीं आपसे रोशनी रोशनी हो गई चांद शर्मा गया देख दिल द्वार पर कैसे इतनी यहां चांदनी हो गई क्या कहे कि खुशिका ठिकाना नहीं आपसे रोशनी रोशनी हो गई छोड़कर निजवतन ब्रम्हा तन में मिले ये नजर पाए जो भाग्य उसके खुले छोड़कर निजवतन ब्रम्हा तन में मिले ये नजर पाए जो भाग्य उसके खुले ज्ञान सागर में आकर रह आया है जो उसकी तो जिंदगी जिंदगी हो गई क्या कहे कि खुशिका ठिकाना नहीं आपसे रोशनी रोशनी हो गई चांद सूरज सितारे सभी आ गए वो नक्षत्र सब गगन के यहा छा गए चांद सूरज सितारे सभी आ गए वो नक्षत्र सब गगन के यहा छा गए शिव के संग सारा ब्रम्हांड ही आ गया जैसे बेहद गगन ये जमी हो गई क्या कहे के खुशिका ठिकाना नहीं आपसे रोशनी रोशनी हो गई चांद शर्मा गया देख दिल द्वार पर कैसे इतनी यहां चांदनी हो गई क्या कहे कि खुशिका ठिकाना नहीं आपसे रोशनी रोशनी हो गई आपसे रोशनी रोशनी हो गई आपसे रोशनी रोशनी हो गई"