

लेलो मुरली गुणोका गहना है आत्म अभिमानी बनके रहना है लेलो मुरली गुणोका गहना है आत्म अभिमानी बनके रहना है ये मुरली शिव की गीता है व्यक्त अव्यक्त आत्म सीता है ये मुरली शिव की गीता है व्यक्त अव्यक्त आतम सीता है वो देखो संगम हो चला है बूढ़ा वो देखो संगम हो चला बूढ़ा लक्ष्य पूरा करो है अधूरा लक्ष्य पूरा करो है अधूरा देखो दृष्टी के समझो इशारे गुलजार प्रभु के तुम दुलारे शिव ब्रम्हा समांन तुम्हे बनना है आत्म अभिमानी बनके रहना है ज्ञान गंगाये ब्रम्हा ने उतारी ज्ञान गंगाये ब्रम्हा ने उतारी है ये पवन ये ब्रम्हकुमारी है ये पवन ये ब्रम्हकुमारी इनके हाथो में स्वर्ग खिलौना है आत्म अभिमानी बनके रहना है देखो ब्रम्हा समांन तुम्हे रहना है आत्म अभिमानी बनके रहना कुंभ करणों को मुरली ने जगाया कुंभ करणों को मुरली ने जगाया रावण माया है क्या समझाया रावण माया है क्या समझाया तुम जलाओ मंदिकारो की होली शिव साजन हमारा है हमजोली ये पारस लोहे को करती सोना है आत्म अभिमानी बनके रहना है आत्म राधा जीवन में लाए आत्म राधा जीवन में लाए लाखो कंसों को कृष्ण बनाए लाखो कंसों को कृष्ण बनाए दिल की धडकन इसको रखना है अति इंद्रिय सुख में रहना है शिव ब्रम्हा समांन तुम्हे रहना है लेलो मुरली गुणोक गहना है आत्म अभिमानी बनके रहना है ये मुरली शिव की गीता है व्यक्त अव्यक्त आतम सीता है _____________________