

स्वर्णिम भारत सपनोका प्यारा भारत अपनोका वसुंधरा पर देखो वो साकार हो रहा है सतयुगी देवी देवो का महारास हो रहा है सतयुगी देवी देवो का महारास हो रहा है महारास हो रहा है निले नभ के नीचे अपना एक भारत मुस्का रहा पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण सुखद स्वर्ग लहरा रहा पावन प्राप्ति के आंगन वैकुंठ वास हो रहा है सतयुगी देवी देवो का महारास हो रहा है सतयुगी देवी देवो का महारास हो रहा है महारास हो रहा है मनमोहक है छटा निराली चारो ओर खुशहाली रंग बिरंगी फुलवारी है डाली डाली हरियाली साज बजाती है धरणी आभास हो रहा है सतयुगी देवी देवो का महारास हो रहा है सतयुगी देवी देवो का महारास हो रहा है महारास हो रहा है मुसकाते मुखसे मधुमंडल से मधुरास छलक रहा है नूरानी नयन से स्नेह का नूर बरस रहा है चमकते हीरो से महलों में प्रकाश हो रहा है सतयुगी देवी देवो का महारास हो रहा है सतयुगी देवी देवो का महारास हो रहा है महारास हो रहा है महारास हो रहा है _______________________________