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आ..आ.. मैं आत्मा आ... में आत्मा हंस बन गई ,अंतर को रोशन करने में आत्मा हंस बन गई ,अंतर को रोशन करने रिमझिम ,रिमझिम बरसती रिमझिम, रिमझिम बरसती मुझपे पावन किरणे मुझपे पावन किरणे मैं आत्मा हंस बन गई, अंतर को रोशन करने मैं आत्मा हंस बन गई ,अंतर को रोशन करने आ... सुनहरा प्रकाश घेरा, फैला है मेरे चारों ओर आनंद ही आनंद में हो रहा है मन विभोर सूर्यमणि को यूं निहारू, शक्तियां मन में भरने में आत्मा हंस बन गई ,अंतर को रोशन करने आ... पवित्रता के पंख लगे हैं ,सुख भरा है मन में उड़ चली हूं बाबा के पास, प्यारे मीठे वतन में निर्मल धारा ,स्नेह सुमन, महके मन उपवन में मैं आत्मा हंस बन गई, अंतर को रोशन करने प्रेम ,शांति ,आनंद के मोतियों से मैं सज गई स्नेह की शहनाई मेरे जहन में अब बज रही बाबा की बाहों में समाए मिलन मनाऊ वतन में मैं आत्मा हंस बन गई ,अंतर को रोशन करने में आत्मा हंस बन गई ,अंतर को रोशन करने अंतर को रोशन करने .. अंतर को रोशन करने