मुखड़ा
मन में उमंग है, दिल में उत्साह है,
प्रत्यक्ष हो बाबा, बस यही चाह है।
मन में उमंग है, दिल में उत्साह है...
अंतरा : १
ब्रह्मा बाबा हमारे बने फ़रिश्ता न्यारे,
हम भी फ़रिश्ता बनें अब देह से न्यारे-प्यारे।
बाबा संग साथ चलें, ये वादा निभाएँ,
सतयुग में भी साथ-साथ हम राज्य में आएँ।
वतन में बाबा हमारी देख रहे राह हैं...
मन में उमंग है, दिल में उत्साह है,
प्रत्यक्ष हो बाबा, बस यही चाह है।
अंतरा : २
तीव्र पुरुषार्थ की लहरें जहाँ में फैलाएँ,
संपन्न बन सभी को संपन्न बनाएँ।
बाबा की आशाओं के हम हैं सितारे,
जगमग फ़रिश्ते हम दिव्य नज़ारे।
सारे संसार की हम पे निगाह है...
मन में उमंग है, दिल में उत्साह है,
प्रत्यक्ष हो बाबा, बस यही चाह है।
अंतरा : ३
बाबा बार-बार हमें यह याद दिलाएँ,
संकल्प और समय को न व्यर्थ गँवाएँ।
शिव-शक्ति, पांडव-पति सदा साथ हों,
मन जीते, जगत जीते—ऐसी याद हो।
ज्वालामुखी योग से मिले शक्ति अथाह है...
मन में उमंग है, दिल में उत्साह है,
प्रत्यक्ष हो बाबा, बस यही चाह है।
