मन पंछी तू उड़ जा वतन में
ऋतु है ये प्रभु मिलने की
मस्त पवन है महका चमन है
मस्त पवन है महका चमन है
बेला है मंगल मिलने की
मन पंछी तू उड़ जा वतन में
ऋतु है ये प्रभु मिलने की
बादल की छाओ से तारो के गांव से
पार चला जा जगकी हवाओसे
पार चला जा जगकी हवाओसे
छोड़ के पीछे निल गगन को
ये घड़ी है प्रभु मिलने की
मन पंछी
भूल के सारे जगका आकर्षण
तोड़ के झूठे देह का बंधन
तोड़ के झूठे देह का बंधन
उड़ जा प्रेम के पंख लगाकर
दिल मै लगन अब मिलने की
मन पंछी
सुख में अाओ हम खो जाए
परम पिता से आनंद पाए
परम पिता से आनंद पाए
प्रभु मिलन के परम सुख से
कालिया खिलती है तन मन की
मन पंछी तू उड जा वतन में
ऋतु है प्रभु मिलने की
मस्त पावन है महका चमन है
मस्त पावन है महका चमन है
बेला है मंगल मिलने की
मन पंछी तू उड जा वतन में
ऋतु है ये प्रभु मिलने की
मन पंछी
