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मन पंछी उड़ो आत्म वतन में मन पंछी उड़ो आत्म वतन में पहनो फरिश्तों वाला चोला मनमानाभव मामेक़म के तार मनमानाभव मामेक़म के तार जोड़लो करो शिव का दीदार अपने वहा भरके आंगन में मन पंछी उड़ो आत्म वतन में हाथो में अमृतकी प्याली फूलो से सजी वो भोगकी थाली हाथो में अमृतकी प्याली फूलो से सजी वो भोगकी थाली आज मनाओ सतगुरुवार आज मनाओ सतगुरुवार जाओ नील गगन के पार बैठे लिए वो इंतजार अंखियनमें बैठे लिए वो इंतजार अंखियनमें मन पंछी……..हो हो हो ब्रम्हा तन में शिवजी पधारे सोए भाग जगाए हमारे ब्रम्हा तन में शिवजी पधारे सोए भाग जगाए हमारे सागर है वो खोले अमृत का द्वार सागर है वो खोले अमृत का द्वार भरना वो सागर अपार झपकी न पलकी उस क्षण मिलन में झपकी न पलकी उस क्षण मिलन में मन पंछी…….. ले जाओ तुम यादे हमारी कहना महक रही फुलवारी ले जाओ तुम यादे हमारी कहना महक रही फुलवारी बैठे है हम पलके बिछाए बैठे है हम पलके बिछाए दिल में रूहानी प्यार समाए संगम के सुहानी सफर में संगम के सुहानी सफर में मन पंछी उड़ो आत्म वतन में मन पंछी उड़ो आत्म वतन में ________________________