

"आ.. मीठे वतन की सैर करूं मैं आ.. मीठे वतन की सैर करूं मैं योग के पंख लगाके अतींद्रिय सुख में खोया रहूं मैं अतींद्रिय सुख में खोया रहूं मैं बाबा की बाहों में समाके मीठे वतन की सैर करूं मैं आ... पांच तत्व के पार है प्यारा अपना वतन स्नेह सागर बाबा अपना मनाते मधुर मिलन जन्म जन्म के पाप धुले हैं सुखसागर में नहाके अतींद्रिय सुख में खोया रहूं मैं बाबा की बाहों में समाके मीठे वतन की सैर करूं मैं आ.. अमृतवेले आंख खुली ज्यों बाबा को सामने पाऊं अमृतवेले आंख खुली ज्यों बाबा को सामने पाऊं शुभ प्रभात कहकर बाबा को खुद को वतन में पाऊं मैं आकर प्यारे बाबा के पास फरिश्ता रूप सजाके अतींद्रिय सुख में खोया रहूं मैं बाबा की बाहों में समाके मीठे वतन की सैर करूं मै आ.. तन मंदिर की मैं हूं आत्मा दिव्य ज्योति बिंदु परमपिता शिव बाबा मेरे वो है स्नेह संधू सबका भाग्य जागा रहा हूं खुद का भाग्य जगाके अतींद्रिय सुख में खोया रहूं मैं बाबा की बाहों में समाके मीठे वतन की सैर करूं मैं योग के पंख लगाके अतींद्रिय सुख में खोया रहूं मैं बाबा की बाहों में समाके बाबा की बाहों में समाके... हु.. ऊ.."