"मेरे मन ..फरिश्ता बन.. उड जा
मेरे मन..फरिश्ता बन...उड जा...मीठे वतन
मेरे मन..फरिश्ता बन...उड जा...मीठे वतन
होकर के मगन,ले दिल की लगन
होकर के मगन,ले दिल की लगन
प्रभु से मनाने मिलन
मेरे मन..फरिश्ता बन...उड जा...मीठे वतन
झिलमिल, झिलमिल झिलमिल, झिलमिल करता हुआ वो रुप अनोखा बनाकर,
रोशनी से सजा हुआ वो, दिव्य नूर फैलाकर
मेरे दिव्य नयन देकर किरण,जग को करें पावन
मेरे मन.. फरिश्ता बन ..उड जा..मीठे वतन
छत्रछाया बनकर, छत्रछाया बनकर, शिव ज्योति वो,सर्व शक्ति भर रहे
सुख शांति और पवित्रता से, श्रृंगार वो कर रहे
पुलकित मन..आये मीठे वतन.. अनुभव करें सघन..
मेरे मन...फरिश्ता बन...उड जा...मीठे वतन
दिव्य.. प्रकाशित.. दिव्य..प्रकाशित
पंख लगाये, मैं तो उड़ रहा हूं
परम सुखों के ख़ज़ानों से सम्पन्न हो रहा हूं
सारे जग को मैं दे रहा, सुख शांति की किरन..
मेरे मन..फरिश्ता बन..उड जा..मीठे वतन
मेरे मन.. फरिश्ता बन..उड जा..मीठे वतन
उड जा..मीठे वतन
उड जा..मीठे वतन"
