"नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
पवित्रता की नाव लेकर चलना है उस पा...र
पवित्रता की नाव लेकर चलना है उस पा...र
इस किनारे बहे दुख की धारा, सुख की धार बहती उस पार
इस किनारे बहे दुख की धारा, सुख की धार बहती उस पार
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
ज्ञान योग का लेके सहारा,हमको चलते जाना है, हमको चलते जाना है
आंधी आए, तूफां आए,कभी नही घबराना है, कभी नहीं घबराना है
पावन लक्ष्य दिया जो शिव ने ... होओ
पावन लक्ष्य दिया जो शिव ने उसमें जीवन का उद्धार
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
शिव पिता बनकर खिवैया, जग को पार लगायें रे,जग को पार लगायें रे
दुःखों का किनारा छुडाकर, सुख की राह सुख की राह दिखाये रे
जन्मों से डूबी हुई नाव ....होओ..
जन्मों से डुबी हुई नाव, वो संगम पर रहा उबार
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
बीच भंवर में फंसा है मानव, मांझी को पुकारे है, मांझी को पुकारे है
डुबो रहे हैं और दुःखों में, ये देह के किनारे हैं, ये देह के किनारे हैं
आया है बनकर किनारा....होओ...
आया है बनकर किनारा,वो ही है शिव निराकार ....
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
पवित्रता की नाव लेकर चलना है उस पा....र
पवित्रता की नाव लेकर चलना है उस पा....र
इस किनारे बहे दुख की धारा, सुख की धार बहती उस पार
इस किनारे बहे दुख की धारा, सुख की धार बहती उस पार
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
नाव पुरानी ओ साथी संभल के चल तू
ओ साथी संभल के चल तू ....ओ साथी रे.....
ओ साथी संभल के चल तू
ओ साथी संभल के चल तू
ओ साथी संभल के चल तू ....ओ साथी रे.....
ओ साथी संभल के चल तू
ओ साथी संभल के चल तू"
