जय हो ओम शांति है बाबा कहते हैं है जितना निराकारी स्थिति में रहेंगे उतना ही सर्व विकारों से मुक्त कि संपूर्ण निर्विकारी बनेंगे [संगीत] कि देश में स्वयं को मैं अपनी अनादि निराकार रूप में को परमधाम घर में और कि चमकती हुई दिव्य मणि कि संपूर्ण पवित्र कि संपूर्ण निर्विकारी अ [संगीत] कि वहां से मैं निराकार ज्योति थे नीचे आई सृष्टि चक्र में है जन्म-मरण का चक्र शुरू हुआ कि सतयुग त्रेता में मैं निराकार आत्मा कि निर्विकारी थी है लेकिन चेक जैसे-जैसे आगे बढ़ाया द्वापर कलयुग में में दीपदान के कार्य में पांच विकारों से मैं आत्मा कि ग्रस्त होती गई पतित काली हो गई हैं [संगीत] कर देगी है अब सिर्फ टीचर के अंत में कि मैं अपने अंतिम दौर में है यह दिल से मैंने पतित पावन शिव बाबा को पुकारा है और वह महज ज्योति परम धाम से अवतरित होने लगी में आ गए मेरे सामने आ को देखें ज्ञान सूर्य श्री बाबा को अपने सामने का ज्ञान सूर्य पापा मैं अपनी पवित्र और शक्तिशाली कहने मुझे प्रदान कर रहे अजय को कि देश में बैठी मैं पीते ही और निराकार आत्मा कि इन थिस पिछड़ों को स्वयं में समा रही है कि मेरा रूम में परिवर्तित हो तृषा रहा है [संगीत] आत्मा निर्मल पावन बनती जा रही है कि मुझे आत्मा मी भरे विकारों का रूप में परिवर्तित होता जा रहा है [संगीत] का काम विकार शुभकामना में परिवर्तित होता जा रहा है है दैहिक भाड़ आत्मिक भाव में बदलता जा रहा है कर दो में सुधार गिनी योगा करने का रूप लेती जा रही है है कि यह योगा करने कि मुझे आत्मा को पवित्र कर रही है कर दो कि मैं अपलक ज्ञान सूर्य को निहार रहा था कि आप उनके तेजस्वी प्रकाश से में प्रकाशित होता हुआ है कि खुद को परिवर्तित होता हुआ अनुभव कर रहा [संगीत] मुझे आत्मा में ठहरे है जन्म-जन्मांतर के मैं जैसे धूल तेज जा रहे हैं [प्रशंसा] तू मुझ में समाई सूक्ष्म लोग वृद्धि अनासक्त वृद्धि लिए बेहद के वैरागी वृद्धि में बदल रही है [संगीत] कि मैं अंदर से भरपूर संतोष जी कि इच्छा मात्र अमित यह स्थिति का अनुभव कर रहा यह मोह रुंध आम आदमी किसने में मैं आरती अभिमान है स्वाभिमान में के सम्मान में बदलता जा रहा है की पवित्रता के साथ आगे इससे कि पहले व्यक्ति वाह कि ज्ञान सूर्य की ओर जसवीर तेजस्वी के ने मुझे आत्मा को संपूर्ण स्वच्छ कि निर्मल कि निर्विकारी बनाती जा रही है कर दो [संगीत] 158 के बाहर बाहर अपनी निराकार यह स्थिति में स्थित हो कभी साकार वतन में है तो कभी मूल वेतन में की पवित्रता के सूर्य श्री बाबा से पवित्र गिरने लेंगे और संपूर्ण निर्विकारी स्थिति का अ का अनुभव करेंगे [संगीत] ए पोयम ओम शांति ओम श्रवण
