

“पहाड़ों पे चल चल के वहां पहुंच जाते थे परंतु बहुत खुशी में ऐसे नहीं कि ये कैसे होगा खुशी होती थी खुशी में हम नाचते रहते थे” ओ दादी तुमसा कोई नहीं ओ ओ ओ दादी तुमसा कोई नहीं ओ ओ मानव मन का कर अभियान फिर भी सबको सुख दिया देख लिया हमने जग सारा पर दिखा न तुमसा कहा ओ दादी तुमसा कोई नहीं ओ ओ ओ मुरली धर की बनी कलम लिखा भाग्य का लेखा सदा रही तुम एकनामी किया सर्वस्व स्वाहा खूबियों की खूब तुम हो दादी सेवा बिन तुम कभी सोई नहीं ओ दादी तुमसा कोई नहीं ओ ओ ओ जग में थी पर जग से न्यारी सबकी थी पर सब से प्यारी ब्रम्हा बाबा के तुम संग रहती बाबा जैसी तुम निरहंकारी चित्रगुप्त बन भाग्य संवारे वाह वाह तुमसा कोई नहीं ओ दादी तुमसा कोई नहीं ओ ओ ओ मानव मन का कर अभियान फिर भी सबको सुख दिया देख लिया हमने जग सारा पर दिखा न तुमसा कहा ओ दादी तुमसा कोई नहीं ओ ओ ओ इशू दादी प्यारी दादी मेरी दादी इशू दादी इशू दादी प्यारी दादी मेरी दादी इशू दादी