ओ मेरे प्राण पपिहे ओ मेरे प्राण पपिहे
तू पियू पियू कर निज अंतर पर अमृत की धार बहाले युग युग की प्यास बुझाले
ओ मेरे प्राण पपिहे ओ मेरे प्राण पपिहे
तू मन में मगन ये दिल की लगन प्यारे प्रभु से लगाले तू प्रभु से मिलन मनाले
ओ मेरे प्राण पपिहे ओ मेरे प्राण पपिहे
ओ मेरे प्राण पपिहे
सारा जग राहे निरख रहा एक बूंद प्यार को तरस रहा
सारा जग राहे निरख रहा एक बूंद प्यार को तरस रहा
आनंद सधन बन कर के वहीं परम प्यार है बरस रहा
तू परम प्रिय का प्रीय बन कर ये प्रीत की रीत निभा ले
तू प्रभु से मिलन मनाले
ओ मेरे प्राण पपिहे ओ मेरे प्राण पपिहे
कितनी नदिया कितनी धारा पर तुझे लुभा ना पाती है
कितनी नदिया कितनी धारा पर तुझे लुभा ना पाती है
संगम युग में प्रभु से मिलती स्वाति की बूंदे भाती है
तू प्रभु की शरण हो जा अर्पण दर्पण जीवन को बना ले
तू प्रभु से मिलन मनाले
ओ मेरे प्राण पपिहे ओ मेरे प्राण पपिहे
चंदा को जो देखे चकोर तू देख निरंतर प्रभु की ओर
चंदा को जो देखे चकोर तू देख निरंतर प्रभु की ओर
ज्योति बिंदु को देख देखकर नाच रहा है मन का मोर
तू मन गागर को शिव सागर में पूरा आज समाले
तू प्रभु से मिलन मनाले
ओ मेरे प्राण पपिहे ओ मेरे प्राण पपिहे
तू पियू पियू कर निज अंतर पर अमृत की धार बहाले युग युग की प्यास बुझाले
ओ मेरे प्राण पपिहे ओ मेरे प्राण पपिहे
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