

ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए बन के फरिश्ता अव्यक्त वतन बाबा के पास आ गए ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए साकार में ली जो पालना साकार में वो सबको दिया जब भी कोई मिले आपसे बाबा का अनुभव किया साकार में ली जो पालना साकार में वो सबको दिया जब भी कोई मिले आपसे बाबा का अनुभव किया हर दिल कहता वह भी दिन लौट आए ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए हर देश विदेश की सेवा कर बाबा को प्रत्यक्ष किया स्नेह प्यार वरदानों से निर्मल भाव से भरपूर किया हर देश विदेश की सेवा कर बाबा को प्रत्यक्ष किया स्नेह प्यार वरदानों से निर्मल भाव से भरपूर किया तभी तो नाम दीदी निर्मला निर्माण हो जो कमाल किए ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए है दिल के स्नेह पुष्प अर्पण सारा जग आज दे रहा ईश्वरीय परिवार जन जन श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहा दिल के स्नेह पुष्प अर्पण सारा जग आज दे रहा ईश्वरीय परिवार जन जन श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहा मीठी मीठी यादों में रहोगे सदा साकार से भले चले गए ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए ओह दीदी आप अव्यक्त हो मीठे वतन को चले गए मीठे वतन को चले गए मीठे वतन को चले गए